Saturday, August 28, 2010

हर चेहरे की हंसी बेमानी लगती है .

हर चेहरे की हंसी बेमानी लगती है
माथे की शिकन परेशानी लगती है।
हर वक़्त जिंदगी में उलझन हैं इतनी
लाचारी एक नई कहानी लगती है।
अपने वजूद में सिमटे हुए हैं सब
रिश्तेदारी भी अब वीरानी लगती है।
रोटी जुटाने की फ़िक्र ओ कोशिश में
इंसान की खो गई जवानी लगती है।
अमीरी चमकती है गरीबी सिसकती है
दुनिया यूँ ही चलती रूमानी लगती है।

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